Wednesday, 27 April 2011

REALISATION


REALISATION
I RECENTLY REALISED THAT God is some form of energy that if harnessed can bring eternal peace. Energy levels of the atom were first described by Bohr Bury in chemistry. The human body is made up of innumerable atoms each having a particular energy forms. We are the part of Panch Tatwa. The five elements earth, vayu, agni, jal and akash or space. How beautifully nature got four assembled in the space called the body. Human body is best described by biologists through the organ system. Now the question arises as to how to harness that energy that would provide permanency to the soul. That is how to attain Godliness. That energy has led to innumerable search. I could get to it through chanting mantras, through deep meditation but what engulfs this energy is darkness, bhay and to overcome this bhay is another challenging task. Something that the renounced souls could do and the common man cannot.

वेदिक मन्त्र गाने तन्त्र
इनका ग्यान या जानकारी या इनका अर्थ जानना इतना जरुरी नही हे जितना इनका प्र्भाव मेह्सूस करना.
ईश्ववर एक अनुभूति हे. वह किसी जाति, बनधन या आकार का नही.अकसर हम अपनी अभिलाशा की पूरा करने के लिये उसके साकार रुप का ध्यान करते है.यह समय हामारी तरफ़ से ईश्वर की परीकश्रा का होता है. जब हम ईश्वर की परीश्रा लेते है तो यदि वह हमारी बात पर ध्यान नही देता तब हम एक नादान बालक के समान उसके विरूद्ध हो जाते है. अनायास ही उससे अपनी नाराजगी जाहिर कर देते है.वह कोई इन्सान तो है नही कि तोफे ला कर हमे कुश कर दे. एसे समय मे हम यदी हम सोचे तो हमे पता चलेगा कि आज जिस द्रिद्र्ता या दुख से हम गुजर रहे है वह हमारी किसी पुरानी सोच का नतीजा है.वह सोच जो हमने अपने या किसी के लिये सोची थी. ईश्वर एक उर्जा है जो हममे है और सरे जगत मे है, वायू मदल मे विदयमान है. आप अपनी सोच के द्वरा इसे अपनी ओर खीचते है.
वेदिक मिन्त्र एक तरीका है इस ऊरजा को सन्चालित करने का.हम ध्यान, मन्त्र, तनत्र द्वारा अपनी सोच को या कामाना को जल्दी प्राप्त कर सकते है.परन्तु ध्यान रहे कि किस चीज का प्रयोग किस प्रकार करना है. य़दि मधुमय के रोगी को अत्यधिक   शुगर दोगे तो नतीजा भुगतना या भोगना होगा.
यह भी एक अनुभूति है. 

1 comment:

  1. I like the way you write about these deeper issues, Savita, specially the energy part

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